Government Initiatives 2026: स्वदेशी टेलीकॉम, AI क्रांति और भविष्य का कौशल विकास

भारत 6G मिशन: 'Frontier' टेक्नोलॉजी में भारत की वैश्विक दावेदारी
साथियों, मुझे याद है जब हम 4G के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर थे, लेकिन आज 2026 में तस्वीर बिल्कुल बदल चुकी है। भारत ने अपने Bharat 6G Mission के दूसरे चरण (Phase 2: 2025-2030) में कदम रख दिया है। फरवरी 2026 में दिल्ली में आयोजित 'भारत 6G संगोष्ठी' में जारी 'दिल्ली घोषणापत्र' ने यह साफ़ कर दिया है कि भारत अब 6G के वैश्विक मानक (Standards) तय करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक दुनिया के 10% 6G पेटेंट भारत से हासिल करना है। यह कोई छोटा लक्ष्य नहीं है, और इसके लिए ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो चुका है।
सरकार ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में 100 से अधिक 5G लैब्स स्थापित की हैं, जो अब 6G-रेडी हो रही हैं। इन लैब्स का असली मकसद हमारे छात्रों और स्टार्टअप्स को वो माहौल देना है जहाँ वे स्वदेशी एंटीना, बेस स्टेशन्स और टेराहर्ट्ज़ (THz) कम्युनिकेशन पर रिसर्च कर सकें। टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) के तहत 300 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। Tech Mobile Sathi के पाठकों के लिए यह गर्व की बात है कि आज हमारे स्टार्टअप्स 'मेड इन इंडिया' 6G सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर काम कर रहे हैं जो न केवल सस्ते हैं बल्कि दुनिया के किसी भी विकसित देश की तकनीक को टक्कर दे सकते हैं।
6G सिर्फ तेज़ इंटरनेट नहीं है, यह एक 'इंटेलिजेंट' नेटवर्क है। यह न केवल डेटा ट्रांसफर करेगा, बल्कि सेंसिंग और इमेजिंग की क्षमता भी रखेगा। सरकार का विज़न 'डिजिटल इंक्लूजन' का है, जहाँ दूर-दराज के गांवों में बैठा किसान भी बिना किसी लैग के 'स्मार्ट खेती' के टूल्स का इस्तेमाल कर सके। 2026 में भारत का यह मिशन हमें एक ऐसा इकोसिस्टम दे रहा है जहाँ हमें विदेशी हार्डवेयर के पीछे नहीं भागना पड़ेगा। हम खुद अपने टावर बनाएंगे, अपनी चिप्स लगाएंगे और अपना नेटवर्क चलाएंगे। यही असली आज़ादी है।
IndiaAI मिशन: स्वदेशी डेटा और मॉडल्स से सजेगा डिजिटल भारत
AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के दौर का नया बिजली है। साल 2026 में भारत का IndiaAI मिशन अपनी पूरी रफ़्तार में है। सरकार ने इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा है। इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है 'AIKosh'—एक राष्ट्रीय डेटासेट प्लेटफॉर्म। यहाँ 7,500 से अधिक डेटासेट्स और 273 से अधिक AI मॉडल्स उपलब्ध हैं। इसका सीधा फायदा हमारे उन स्टार्टअप्स को मिल रहा है जिनके पास डेटा जमा करने के लिए करोड़ों रुपये नहीं थे। अब वे इस सरकारी खजाने का इस्तेमाल करके 'भारत-विशिष्ट' समाधान (India-specific solutions) बना रहे हैं।
एक और बड़ी उपलब्धि है 'BharatGen' प्रोजेक्ट। IIT बॉम्बे और अन्य संस्थानों के सहयोग से विकसित यह प्रोजेक्ट भारत की अपनी 'लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल्स' (LMMs) बना रहा है। ये मॉडल्स न केवल हिंदी या अंग्रेजी, बल्कि हमारी क्षेत्रीय बोलियों और भाषाओं में भी काम करते हैं। फरवरी 2026 में आयोजित 'India-AI Impact Summit' में प्रधानमंत्री ने इन स्वदेशी मॉडल्स की ताकत दिखाई। अब हमें अपनी ज़रूरतों के लिए केवल ChatGPT या Google Gemini पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है। हमारे पास अपना 'BrahmAI' और 'Yukti' जैसे मॉडल्स हैं जो भारतीय संदर्भ (Context) को बेहतर समझते हैं।
सरकार ने AI के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग पावर (GPUs) को भी सस्ता कर दिया है। IndiaAI Compute Pillar के तहत 38,000 से अधिक GPUs को ऑनबोर्ड किया गया है, जो स्टार्टअप्स को रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे भारत में AI का 'लोकतंत्रीकरण' (Democratization) हो रहा है। Tech Mobile Sathi पर मैं हमेशा कहता हूँ कि तकनीक तभी सफल है जब वह सबकी पहुँच में हो। 2026 में भारत की AI नीति का केंद्र 'एआई फॉर ऑल' (AI for All) है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आम आदमी की मदद कर रहा है।
ISM 2.0 और स्वदेशी चिप्स: भारत के अपने 'माइक्रोप्रोसेसर' का उदय
जब हम स्वदेशी तकनीक की बात करते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती 'सेमीकंडक्टर चिप्स' की होती है। बजट 2026-27 में सरकार ने India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 की घोषणा की है। इस नए चरण का मुख्य फोकस केवल चिप बनाना नहीं, बल्कि चिप बनाने वाली मशीनें और सामग्री भी भारत में तैयार करना है। 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन के साथ, सरकार अब 3-नैनोमीटर और 2-नैनोमीटर जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है। यह भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक मज़बूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।
एक बड़ी जीत जो हमें 2026 की शुरुआत में देखने को मिली, वो है 'DHRUV64'—C-DAC द्वारा विकसित पूरी तरह से स्वदेशी 64-बिट माइक्रोप्रोसेसर। यह प्रोसेसर हमारे 5G इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक मशीनों की जान बनेगा। इसके अलावा, Digital India RISC-V (DIR-V) प्रोग्राम के तहत बने ओपन-सोर्स प्रोसेसर अब लाइसेंस फीस के बोझ को खत्म कर रहे हैं। इससे हमारे स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं को बहुत बड़ी राहत मिली है क्योंकि अब उन्हें विदेशी कंपनियों को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी नहीं देनी पड़ती।
गुजरात के धोलेरा और साणंद के साथ-साथ अब उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी बड़े सेमीकंडक्टर फैब्स (Fabs) बन रहे हैं। ये केवल फैक्ट्रियां नहीं हैं, ये भारत के तकनीकी स्वाभिमान के मंदिर हैं। ISM 2.0 का लक्ष्य है कि 2029 तक भारत अपनी ज़रूरतों की 70-75% चिप्स खुद डिजाइन और मैन्युफैक्चर करे। जब आपके फोन की चिप भारत में बनी होगी, तो वह न केवल सस्ता होगा बल्कि अधिक सुरक्षित भी होगा। कमल कृपाल के तौर पर मेरा मानना है कि चिप्स की यह लड़ाई ही तय करेगी कि भविष्य में दुनिया का नेतृत्व कौन करेगा, और भारत इसमें बहुत मज़बूती से खड़ा है।
नेशनल AI स्किलिंग: 10 लाख युवाओं को 'फ्यूचर-रेडी' बनाने का लक्ष्य
सिर्फ मशीनें और सॉफ्टवेयर बनाने से काम नहीं चलेगा, उन्हें चलाने वाले हुनरमंद हाथ भी चाहिए। जनवरी 2026 में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक महत्वाकांक्षी AI स्किलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य एक साल के भीतर 10 लाख (एक मिलियन) युवाओं को प्रशिक्षित करना है। यह प्रोग्राम केवल इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों के लिए नहीं है, बल्कि इसमें आईटीआई (ITIs) और पॉलिटेक्निक के छात्रों को भी शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि AI का ज्ञान अब केवल एक 'एलीट' स्किल नहीं, बल्कि बुनियादी ज़रूरत होनी चाहिए।
इसी दिशा में एक बहुत ही अनूठी पहल है 'Yuva AI for All' और इसकी 'Kaushal Rath' मोबाइल लैब। यह एक बस है जो आधुनिक कंप्यूटर लैब्स और इंटरनेट से लैस है, और यह छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में जा रही है। इसका मकसद उन बच्चों को AI की बुनियादी जानकारी देना है जो शायद कभी बड़े शहरों के कोचिंग सेंटर्स तक नहीं पहुँच सकते। इसके अलावा, स्कूलों के लिए 'SOAR' (Skilling for AI Readiness) प्रोग्राम शुरू किया गया है जो कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों में AI के प्रति जागरूकता और बुनियादी कोडिंग स्किल्स विकसित कर रहा है।
उच्च शिक्षा के लिए, सरकार 500 पीएचडी फेलोशिप और हज़ारों पोस्ट-ग्रेजुएट फेलोशिप दे रही है। टायर-2 और टायर-3 शहरों में 30 से अधिक डेटा और AI लैब्स खोली गई हैं। Tech Mobile Sathi के मेरे युवा साथियों, अगर आप आज AI नहीं सीख रहे हैं, तो आप पीछे छूट रहे हैं। सरकार आपको मंच दे रही है, स्किल्स दे रही है और फेलोशिप भी दे रही है। 2026 का भारत चाहता है कि हमारा युवा केवल कोड न लिखे, बल्कि वो एआई एथिक्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और डेटा गवर्नेंस जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी एक्सपर्ट बने। यही वो वर्कफोर्स है जो भारत को 'Viksit Bharat 2047' के सपने तक पहुँचाएगी।
सुरक्षित और भरोसेमंद AI: नागरिक सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश
जैसे-जैसे हम तकनीक में आगे बढ़ रहे हैं, खतरे भी बढ़ रहे हैं। डीपफेक, डेटा चोरी और पक्षपाती (Biased) एल्गोरिदम 2026 की बड़ी चिंताएं हैं। इसे देखते हुए, सरकार ने 'IndiaAI Safety Institute' (AISI) की स्थापना की है। यह संस्थान AI के जोखिमों की पहचान करने, मानक (Standards) तय करने और यह सुनिश्चित करने का काम करता है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल भलाई के लिए हो। सरकार ने 'Safe and Trusted AI' के लिए सख्त एआई गवर्नेंस दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
इन नियमों के तहत, बड़ी तकनीकी कंपनियों को अब अपने AI मॉडल्स की पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करनी होगी। अगर कोई AI टूल किसी नागरिक के साथ भेदभाव करता है या गलत जानकारी फैलाता है, तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। नीति आयोग ने 'Mission Digital ShramSetu' का प्रस्ताव दिया है जो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को AI के माध्यम से सशक्त बनाने और उन्हें डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने का काम करेगा। यह तकनीकी प्रगति और नैतिकता (Ethics) के बीच संतुलन बनाने की एक मज़बूत कोशिश है।
कमल कृपाल के तौर पर मेरा मानना है कि सुरक्षा के बिना तकनीक एक दोधारी तलवार है। सरकार का यह रुख कि 'इनोवेशन के साथ जिम्मेदारी' (Innovation with Responsibility) ज़रूरी है, स्वागत योग्य है। 2026 में भारत का ज़ोर 'सॉवरेन एआई' (Sovereign AI) पर है—यानी ऐसी तकनीक जिस पर हमारा पूरा नियंत्रण हो और जो हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करे। जब हम अपना खुद का 'सेफ एआई' इकोसिस्टम बना लेंगे, तभी हम वैश्विक मंच पर सीना तान कर कह सकेंगे कि भारत की प्रगति मानवीय मूल्यों और सुरक्षा पर टिकी है।
Conclusion
दोस्तों, 2026 के ये सरकारी कदम यह साबित करते हैं कि भारत अब 'फॉलोअर' नहीं, बल्कि 'लीडर' बन चुका है। स्वदेशी 6G का विज़न, IndiaAI मिशन की ताकत, ISM 2.0 का चिप आत्मनिर्भरता का संकल्प और लाखों युवाओं का स्किलिंग—ये सब मिलकर एक नए 'डिजिटल उदय' की कहानी लिख रहे हैं। तकनीक का असली मकसद तभी पूरा होता है जब वह आम आदमी के जीवन को सुगम बनाए। मुझे पूरा विश्वास है कि इन पहलों से न केवल नई नौकरियां पैदा होंगी, बल्कि भारत तकनीकी रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा। आपको सरकार की कौन सी पहल सबसे बेहतरीन लगी? अपनी राय नीचे कमेंट्स में ज़रूर लिखें। जुड़े रहिये Tech Mobile Sathi के साथ ऐसी ही और भी क्रांतिकारी जानकारियों के लिए।